उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का ज़ीरो-टॉलरेंस है। ऐसा यूपी सरकार कहती है। विशाल खर्चों पर हो रहे विशाल विज्ञापनों के जरिए ऐसा ही कहा जा रहा है। इसी कहने और ढोल पीटने के नियोजित शोर में समानान्तर सच जानना भी जरूरी है। आज आपके सामने राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन यानी नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) में व्याप्त अराजकता और भ्रष्टाचार के कुछ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूं। इससे आपको अहसास होगा कि शासन का भ्रष्टाचार पर
कितना नियंत्रण है या असलियत में कितनी मिलीभगत है। यह वही एनएचएम है, जिसकी ग्रामीण शाखा अर्थात राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का अरबों का घोटाला लोगों को आज तक याद है। घोटाले में हुई सिलसिलेवार हत्याएं याद हैं... और उन हत्याओं पर किस तरह पर्दा डाला गया, यह भी लोगों को याद है। बाद के दौर में ग्रामीण और शहरी दोनों एनएचएम में मिश्रित हो गए और एनएचएम मिश्रित भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया। धन के लिए एनएचएम किसी भी स्तर पर गिरने के लिए तैयार है। धोखाधड़ी,
फर्जीवाड़ा और गैर कानूनी निर्णय भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस पर भद्दे मजाक
की तरह चस्पा हो रहा है। नेशनल हेल्थ मिशन के बजाय यह नीति हीन मिशन हो गया है। उसे आप देखें और भ्रष्टाचार पर
सरकार ज़ीरो टॉलरेंस की असलियत समझें...
Tuesday, 24 December 2024
भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस नहीं, ज़ीरो कंट्रोल बोलिए
Saturday, 7 September 2024
भेड़ियों का भेड़ियों में खिंच गया है म्यान..!
Monday, 12 August 2024
साजिशों से सावधान रहें मोदी जी..!
आप देख और सुन रहे हैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चल रहे अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय षडयंत्र के धागे उधेड़ने वाली सिलसिलेवार तथ्यपूर्ण कहानियां। नरेंद्र मोदी को न केवल भारत के अंदर बल्कि चारों तरफ से कमजोर करने की साजिशें चल रही हैं। श्रीलंका और मालदीव के जरिए भी साजिशों को आजमाया गया। नेपाल को भी भारत विरोधी बनाने की साजिशें जारी हैं। इन्हीं साजिशों को बांग्लादेश पर भी आजमाया गया। बांग्लादेश के नेता और नागरिक नासमझ, कट्टरांध और भ्रष्टाचारी निकले इसलिए बांग्लादेश उस भीषण चक्रव्यूह में फंस गया। ...और धराशाई हो गया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भारतीय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन साजिशों के बारे में पहले ही बता दिया था। उन्होंने मोदी से मदद भी मांगी थी। लेकिन मोदी की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। भारत के समर्थक पड़ोसी देशों का बड़ा भाई होने का भरोसा भारत ने खो दिया। भारत के इस रवैये से 1971 का दौर याद आ गया, जब भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को तोड़ कर, पाकिस्तानी सेना को घुटनों के बल बिठाने की हद तक जाकर बांग्लादेशियों की मदद थी। भारत ने मालदीव में सेना उतार कर वहां तख्तापलट की साजिशों को पलट दिया था। ऐसे कई उदाहरण हैं हमारे सामने, लेकिन हमने एक और ऐसा ऐतिहासिक उदाहरण बनने का अवसर खो दिया।
भारत खुद उन षडयंत्रों से घिरा है। बाहरी और भीतरी षडयंत्रकारियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुद्धि, विवेक और दृढ़ता से निपटना होगा। यह कोई व्यक्तिगत मसला नहीं, यह सम्पूर्ण देश की अस्मिता और उसके अस्तित्व की सुरक्षा का मसला है। इन षडयंत्रों का ध्वस्त होना देश के लिए जरूरी है। देश के बारे में चिंता करने वाले नागरिकों का दायित्व है देश के खिलाफ होने वाले षडयंत्रों को समझना और उससे देश को बचाने का जतन करना...
Tuesday, 30 July 2024
बन कर मुसलमानों का सगा, जम कर मुसलमानों को ठगा
Saturday, 27 July 2024
मोदी के पीछे पड़ी खूबसूरत चुड़ैल..!
नरेंद्र मोदी के खिलाफ हुए और हो रहे देसी विदेशी और घरेलू षड्यंत्रों को खंगालने के क्रम में यह तीसरी कड़ी आपके समक्ष प्रस्तुत है। इन षडयंत्रों को चीन और अमेरिका मिल कर क्यों हवा पानी दे रहा है, इसे समझना जरूरी है। जो ऊपर ऊपर दिखता है उसके भीतर भीतर जाकर देखना जरूरी होता है। ...और जब आप भीतर का दृश्य देखेंगे तो आपको ऊपर के ठीक विपरीत और बदला हुआ कथानक दिखेगा। नरेंद्र मोदी के खिलाफ चले षडयंत्रों को समझने के लिए भीतर के धागे उधेड़ना बेहद जरूरी है। तो आइये, हम इस कथानक में घुसें, घूमें और जानें... ताकि उसके आगे की कड़ी खोलने के पहले हमारे दिमाग में देश विरोधी षडयंत्र को लेकर जो भी धुंध रहा हो, वह साफ हो जाए।
Thursday, 18 July 2024
मोसादेग के बाद मोदी..?
Monday, 15 July 2024
लोकतंत्र हारा: पैसा, शराब, फरेब और झूठ जीता
साजिश में विपक्षी और सत्तापक्षी दोनों बराबर थे शामिल
भाजपा नेताओं ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों को हराया
नरेंद्र मोदी को पराजित कर वे खुद बनना चाहते थे पीएम
लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार की समीक्षा के नाम पर भाजपा में शीर्ष से लेकर नीर्ष तक तमाम नौटंकियां अब भी जारी हैं... लेकिन कोई भी शीर्ष नेता समीक्षा बैठकों में आईना लेकर नहीं बैठ रहा। उसने भाजपा की दुर्गत करने में अपनी खुद की भूमिका क्या निभाई, वह देख नहीं रहा और न कोई दिखाने का साहस कर पा रहा है। इस बार के चुनाव में खास तौर पर बाहरी शैतानी शक्तियों और पश्चिम के विध्वंसक पूंजीपशुओं ने खुल कर खेला, अपने सारे हथकंडे इस्तेमाल किए। लेकिन इसे रोकने में अमित शाह का मंत्रालय पूरी तरह फेल रहा। मोदी के खिलाफ धन, दारू, झूठ और अफवाहों का बोलबाला रहा। वोटों की खुलेआम खरीद-बिक्री हुई। भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं ने नरेंद्र मोदी को हराने के लिए बाकी की कसर पूरी की। अन्य दलों का सहयोग लेकर नरेंद्र मोदी के बजाय खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए बिसात बिछा दी गई थी। लेकिन संसद को अधर में डाल कर अपनी गोटी लाल करने की बिसात काम नहीं आई और भाजपा को इतनी सीटें आ गईं कि नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने में दिक्कत नहीं आई। केंद्रीय मंत्री रहे कौशल किशोर लखनऊ संसदीय क्षेत्र से सटे मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र से लगातार जीतते रहे हैं। कौशल किशोर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पड़ोसी सांसद रहे हैं। चुनाव से जुड़े तमाम प्रसंगों पर कौशल किशोर से विस्तार से बातचीत हुई। बातचीत लंबी जरूर है, लेकिन उसे सुनें तो कई ऐसे तथ्य मिलेंगे जो आपको भाजपा की खास तौर पर यूपी में हुई दुर्दशा की दशा दिखाएंगे...