विदेशों से आए धन पर खूब नाचे नेता, पत्रकार और वोटर
साजिश में विपक्षी और सत्तापक्षी दोनों बराबर थे शामिल
भाजपा नेताओं ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों को हराया
नरेंद्र मोदी को पराजित कर वे खुद बनना चाहते थे पीएम
लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार की समीक्षा के नाम पर भाजपा में शीर्ष से लेकर नीर्ष तक तमाम नौटंकियां अब भी जारी हैं... लेकिन कोई भी शीर्ष नेता समीक्षा बैठकों में आईना लेकर नहीं बैठ रहा। उसने भाजपा की दुर्गत करने में अपनी खुद की भूमिका क्या निभाई, वह देख नहीं रहा और न कोई दिखाने का साहस कर पा रहा है। इस बार के चुनाव में खास तौर पर बाहरी शैतानी शक्तियों और पश्चिम के विध्वंसक पूंजीपशुओं ने खुल कर खेला, अपने सारे हथकंडे इस्तेमाल किए। लेकिन इसे रोकने में अमित शाह का मंत्रालय पूरी तरह फेल रहा। मोदी के खिलाफ धन, दारू, झूठ और अफवाहों का बोलबाला रहा। वोटों की खुलेआम खरीद-बिक्री हुई। भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं ने नरेंद्र मोदी को हराने के लिए बाकी की कसर पूरी की। अन्य दलों का सहयोग लेकर नरेंद्र मोदी के बजाय खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए बिसात बिछा दी गई थी। लेकिन संसद को अधर में डाल कर अपनी गोटी लाल करने की बिसात काम नहीं आई और भाजपा को इतनी सीटें आ गईं कि नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने में दिक्कत नहीं आई। केंद्रीय मंत्री रहे कौशल किशोर लखनऊ संसदीय क्षेत्र से सटे मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र से लगातार जीतते रहे हैं। कौशल किशोर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पड़ोसी सांसद रहे हैं। चुनाव से जुड़े तमाम प्रसंगों पर कौशल किशोर से विस्तार से बातचीत हुई। बातचीत लंबी जरूर है, लेकिन उसे सुनें तो कई ऐसे तथ्य मिलेंगे जो आपको भाजपा की खास तौर पर यूपी में हुई दुर्दशा की दशा दिखाएंगे...
साजिश में विपक्षी और सत्तापक्षी दोनों बराबर थे शामिल
भाजपा नेताओं ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों को हराया
नरेंद्र मोदी को पराजित कर वे खुद बनना चाहते थे पीएम
लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार की समीक्षा के नाम पर भाजपा में शीर्ष से लेकर नीर्ष तक तमाम नौटंकियां अब भी जारी हैं... लेकिन कोई भी शीर्ष नेता समीक्षा बैठकों में आईना लेकर नहीं बैठ रहा। उसने भाजपा की दुर्गत करने में अपनी खुद की भूमिका क्या निभाई, वह देख नहीं रहा और न कोई दिखाने का साहस कर पा रहा है। इस बार के चुनाव में खास तौर पर बाहरी शैतानी शक्तियों और पश्चिम के विध्वंसक पूंजीपशुओं ने खुल कर खेला, अपने सारे हथकंडे इस्तेमाल किए। लेकिन इसे रोकने में अमित शाह का मंत्रालय पूरी तरह फेल रहा। मोदी के खिलाफ धन, दारू, झूठ और अफवाहों का बोलबाला रहा। वोटों की खुलेआम खरीद-बिक्री हुई। भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं ने नरेंद्र मोदी को हराने के लिए बाकी की कसर पूरी की। अन्य दलों का सहयोग लेकर नरेंद्र मोदी के बजाय खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए बिसात बिछा दी गई थी। लेकिन संसद को अधर में डाल कर अपनी गोटी लाल करने की बिसात काम नहीं आई और भाजपा को इतनी सीटें आ गईं कि नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने में दिक्कत नहीं आई। केंद्रीय मंत्री रहे कौशल किशोर लखनऊ संसदीय क्षेत्र से सटे मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र से लगातार जीतते रहे हैं। कौशल किशोर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पड़ोसी सांसद रहे हैं। चुनाव से जुड़े तमाम प्रसंगों पर कौशल किशोर से विस्तार से बातचीत हुई। बातचीत लंबी जरूर है, लेकिन उसे सुनें तो कई ऐसे तथ्य मिलेंगे जो आपको भाजपा की खास तौर पर यूपी में हुई दुर्दशा की दशा दिखाएंगे...
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