भारत में मजदूरों का दायरा और शोषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। समाज का निम्न मध्यम वर्ग भी मजदूरों के दायरे में शामिल है। शोषण का हाल यह है कि विधायिका से लेकर न्यायपालिका तक मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का हक दिए जाने के भी पक्ष में नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र बाह्यस्रोत यानि आउट-सोर्सिंग से चल रहा है। नौकरी नहीं है, लेकिन ठेके पर जो कुछ भी मिलता है, उसकी भी लूट मची है। इस परिणति के लिए ‘भठ’ से लेकर ‘मठ’ तक दोषी है... यानी भ्रष्ट राजनीति और न्याय के मठ इस घोर पाप के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन इस नक्कारखाने में कोई किसे कहे, कितनी ऊंची आवाज लगाए..? श्रम श्राद्ध दिवस पर और क्या कहें... आप खुद सुनिए।
Friday, 1 May 2026
‘भठ’ और ‘मठ’ हैं श्रमजीवियों के असली शत्रु..!
भारत में मजदूरों का दायरा और शोषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। समाज का निम्न मध्यम वर्ग भी मजदूरों के दायरे में शामिल है। शोषण का हाल यह है कि विधायिका से लेकर न्यायपालिका तक मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का हक दिए जाने के भी पक्ष में नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र बाह्यस्रोत यानि आउट-सोर्सिंग से चल रहा है। नौकरी नहीं है, लेकिन ठेके पर जो कुछ भी मिलता है, उसकी भी लूट मची है। इस परिणति के लिए ‘भठ’ से लेकर ‘मठ’ तक दोषी है... यानी भ्रष्ट राजनीति और न्याय के मठ इस घोर पाप के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन इस नक्कारखाने में कोई किसे कहे, कितनी ऊंची आवाज लगाए..? श्रम श्राद्ध दिवस पर और क्या कहें... आप खुद सुनिए।
Thursday, 30 April 2026
उल्टा पड़ा ‘पासी’ वाला पासा, सत्ता-शक्ति ने घुटने टेके
भाजपा के ही नेता भाजपा
के खिलाफ बिसात बिछाए बैठे थे और एक बड़े प्रभावशाली दलित समुदाय को भाजपा से
अलग-थलग करने के कुचक्र में लगे थे... लेकिन उसका बड़ा ही नाटकीय पटाक्षेप हुआ...
आप भी देखें और समझें...
Saturday, 25 April 2026
बिल भी गिर गया, नारी भी नहीं रूठी... सांप भी मर गया लाठी भी नहीं टूटी..!
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का लोकसभा में प्रस्तुत होना और बहुमत के अभाव में गिर जाना, यह पूरे देश ने देखा... लेकिन इसके पीछे बिछाई गई बिसात कोई देख नहीं पाया। विपक्ष के नेता ही नहीं देख पाए और भाजपा के बिछाए जाल में बुरी तरह फंस गए। अब विपक्ष के स्वनामधन्य नेताओं को यह समझ में नहीं आ रहा कि वे इस जाल से कैसे निकलें। अब पछताए होत क्या... यह कहावत सही साबित हुई। आइये हम सब मिल कर समझते हैं कि भाजपा संसद में हार कर भी कैसे जीत गई... प्रभात रंजन दीन
‘सोल-सिंथेसिस’ और जल पर रहे 100 घंटे
झटके में तो आपको यह व्यक्तिगत मसला लग सकता है... लेकिन इस प्रस्तुति में थोड़ा अंदर झांकेंगे और अपने अंत:करण की सुनेंगे तो आप इस प्रयोग के अनुभवों का सात्विक आनंद उठा पाएंगे। ऐसा मेरा विश्वास है कि यह प्रस्तुति आपको समाचारों की भीड़ और विश्लेषणों की मंडी से अलग की दुनिया में ले जाएगी। शरीर और दिमाग से अलग कभी आत्मा के तल पर भी हमलोग विमर्श कर सकते हैं न..! आप देखेंगे तभी तो यह तय कर पाएंगे... प्रभात रंजन दीन
https://youtu.be/qAJEobXMwxE
Friday, 5 December 2025
दो विमान क्रैश, एक लापता...
लोक मर रहा है, तंत्र तर रहा है...
प्रस्तुत है भारत सरकार की लापरवाही और गैर जिम्मेदारी के तीन गंभीर
एवं अक्षम्य उदाहरण। आप यह समाचार-प्रस्तुति देखेंगे तो आपको हैरत होगी कि क्या
सरकार ऐसी लापरवाह और जन-विरोधी हरकतें भी कर सकती है! हां, भारत में ऐसा ही
होता रहा है। गैरजिम्मेदार हादसे, लापरवाह नुकसान, बेमानी शहादतें और बेइलाज मौतें
भारत के आम आदमी के खाते में रहती हैं... खास लोग इन सबसे अलग और
सुरक्षित-संरक्षित रहते हैं। देश का निरीह आम नागरिक पस्त है और
नेता-नौकरशाह-पूंजीशाह मस्त है। लोक मर रहा है और तंत्र तर रहा है...
Sunday, 30 November 2025
SIR से बचने के लिए मुस्लिम घुसपैठिए अपना रहे हिंदू नाम
SIR से बचने के लिए मुस्लिम घुसपैठिए अपना रहे हिंदू नाम
मतदाता सूची
में आवश्यक संशोधन जाग्रत लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त है। जो ताकतें लोकतंत्र को
मलबा बनाए रख कर सत्ता साधती रही हैं, उन्हें जाग्रत देश मंजूर नहीं, उन्हें तो बस वोटों की गिनती चाहिए, चाहे वह
दीमकों का हो या आस्तीन के सांपों का। बिहार चुनाव के बाद देश के 15 राज्यों में
मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। पश्चिम बंगाल में इसकी सबसे अधिक
छटपटाहट है। वोट के लिए इस राज्य में सबसे अधिक घुसपैठ कराई गई इसीलिए छटपटाहट भी
यहां पर सबसे अधिक है। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश के मुस्लिम घुसपैठियों को भारी
तादाद में वोटर बनाया गया। अब वोटर लिस्ट में बने रहने के लिए वही मुस्लिम
घुसपैठिए सारे इस्लामिक उपदेश ताक पर रख कर हिंदू नाम अपना रहे हैं। इस हथकंडे पर
न फतवाधारी मौलाना कुछ बोल रहे हैं और न दुर्गतिगामी प्रगतिशील चिहुंक रहे हैं। सब
तरफ शातिराना सन्नाटा तना हुआ है। इस समाचार प्रस्तुति को विस्तार से सुनें तो
आपको गंभीरता और तुष्टिकरण की वीभत्सता का सही अंदाजा लगेगा...
Saturday, 15 November 2025
‘सेंटिमेंटैलिटी’ ने तय कर दी ‘पॉलिटिकैलिटी’
‘सेंटिमेंटैलिटी’ ने तय कर दी ‘पॉलिटिकैलिटी’