भारत में मजदूरों का दायरा और शोषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। समाज का निम्न मध्यम वर्ग भी मजदूरों के दायरे में शामिल है। शोषण का हाल यह है कि विधायिका से लेकर न्यायपालिका तक मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का हक दिए जाने के भी पक्ष में नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र बाह्यस्रोत यानि आउट-सोर्सिंग से चल रहा है। नौकरी नहीं है, लेकिन ठेके पर जो कुछ भी मिलता है, उसकी भी लूट मची है। इस परिणति के लिए ‘भठ’ से लेकर ‘मठ’ तक दोषी है... यानी भ्रष्ट राजनीति और न्याय के मठ इस घोर पाप के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन इस नक्कारखाने में कोई किसे कहे, कितनी ऊंची आवाज लगाए..? श्रम श्राद्ध दिवस पर और क्या कहें... आप खुद सुनिए।
Friday, 1 May 2026
‘भठ’ और ‘मठ’ हैं श्रमजीवियों के असली शत्रु..!
भारत में मजदूरों का दायरा और शोषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। समाज का निम्न मध्यम वर्ग भी मजदूरों के दायरे में शामिल है। शोषण का हाल यह है कि विधायिका से लेकर न्यायपालिका तक मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का हक दिए जाने के भी पक्ष में नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र बाह्यस्रोत यानि आउट-सोर्सिंग से चल रहा है। नौकरी नहीं है, लेकिन ठेके पर जो कुछ भी मिलता है, उसकी भी लूट मची है। इस परिणति के लिए ‘भठ’ से लेकर ‘मठ’ तक दोषी है... यानी भ्रष्ट राजनीति और न्याय के मठ इस घोर पाप के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन इस नक्कारखाने में कोई किसे कहे, कितनी ऊंची आवाज लगाए..? श्रम श्राद्ध दिवस पर और क्या कहें... आप खुद सुनिए।
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