Thursday, 28 April 2022

आज़म को योगी सरकार का संरक्षण, मुख्तार को विधानसभा का प्रोटेक्शन


आज़म खान और मुख्तार अंसारी जैसे लोगों पर बदनाम होने का कोई असर नहीं होता। ये दोनों नाम उत्तर प्रदेश क्या, देशभर के लोग जानते हैं। इनकी करतूतें और इनकी कुख्याति देश-दुनिया में फैल चुकी हैं। ये दोनों शख्स जेल में हैं। प्रचार बहुत है कि उत्तर प्रदेश में माफियाओं और सफेदपोश सरगनाओं पर बाबा का बुल्डोजर चल रहा है... लेकिन जमीनी असलियत कुछ और ही है। आप तथ्यों में जाएंगे तो खास तौर पर पाएंगे कि आज़म खान पर हो रही अदालती कार्यवाहियों और शासनिक कार्रवाइयों में बिल्कुल विपरीत का अंतर है। अदालती कार्यवाहियां ऊपर-ऊपर केवल पत्तों पर लक्षित हैं। योगी सरकार की कृपा से आज़म की जड़ें बिल्कुल प्रोटेक्टेड हैं। साफ-साफ प्रतीत होगा कि आज़म खान को योगी आदित्यनाथ सरकार का संरक्षण मिल रहा है। दूसरी तरफ मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश विधानसभा का प्रोटेक्शन मिलता रहा है। यहां तक कि इसके लिए विधानसभा-तंत्र ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी भ्रमित सूचनाएं देने से परहेज नहीं किया। विधानसभा के शीर्ष तंत्र की अनैतिक-कृपा के कारण मुख्तार की जड़ों में खाद-पानी निर्बाध गति से पहुंचता रहा। कुछ पत्ते उखाड़ कर सरकार प्रचार का सुख बटोरती रही। आप भी देखें, सत्ता और सियासत में क्या-क्या मक्कारियां होती हैं, दिखती कुछ हैं, पर होती कुछ और हैं...


Thursday, 14 April 2022

संसद से पास विधेयक 'एडवांस अलर्ट मैसेज' है...


Bill passed by Parliament is an Advance Alert Message...

सामूहिक विनाश के हथियारों का गोरखधंधा रोकने वाला विधेयक संसद से पास हो गया है। इस खबर को मीडिया ने प्राथमिकता से नहीं लिया। देश के लोगों ने भी विधेयक के 'Time & Target' का विश्लेषण नहीं किया। भारत में बड़ी तादाद में गैरकानूनी तरीके से सामूहिक विनाश के हथियार बनाए जा रहे हैं। इन हथियारों को बनाने में खतरनाक रसायन और विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत में सामूहिक विनाश के हथियार क्यों बनाए जा रहे हैं..? उसे तमाम जगहों पर ट्रांसपोर्ट क्यों किया जा रहा है..? इसके पीछे क्या इरादे हैं और क्या तैयारी है..? इस पर हमें पैनी नजर रखनी चाहिए। भारत के जिम्मेदार और वफादार नागरिक का यह नैतिक दायित्व भी है। पिछले दिनों संसद से पारित हुए 'सामूहिक विनाश के हथियार एवं उसके वितरण (गैरकानूनी गतिविधि प्रतिबंध) संशोधन विधेयक-2022' को सामने रख कर हमें अपने देश की जमीनी असलियत की सूक्ष्मता से पड़ताल करनी चाहिए। क्या खुफिया एजेंसियों की सूचनाएं और संसद के पटल पर विधेयक रखे जाने के समय का कोई अंतरसम्बन्ध है..? आइये इसे समझते हैं... घातक रसायनों, आग्नेयास्त्रों, विस्फोटकों और प्रतिबंधित दवाओं का मकड़जाल किस तरह हमें चारों तरफ से घेरता और जकड़ता जा रहा है, इसे समझना जरूरी है... जाल काटने के लिए समझना जरूरी है। 

Sunday, 27 March 2022

योगी का व्यापक जन-सम्मान पचा नहीं पाए भाजपा के शीर्ष नेता...


योगी का व्यापक जन-सम्मान पचा नहीं पाए भाजपा के शीर्ष नेता, दबाव देकर योगी पर थोपे संविधान-विरोधी निर्णय...
मेरा पिछला कार्यक्रम 'शपथ लेंगे, झूठ बोलेंगे, भ्रष्टाचार करेंगे.. और क्या..!' आप लोगों ने पसंद किया, इसके लिए मैं आभारी हूं। आप लोगों ने उसे पसंद इसलिए भी किया कि वह आपको जीवन-पटल पर चरितार्थ होता हुआ दिखता है। उसी यथार्थ की यह दूसरी कड़ी है। उत्तर प्रदेश में बेशुमार खर्चे से आयोजित हुए शपथ ग्रहण में वह सारे कर्मकांड हुए जो भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक नैतिकता से बिल्कुल परे थे। भारतीय जनता पार्टी के केंद्र में नीति-नियंता बने बैठे वरिष्ठ नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यापक जन-स्वीकार्यता का सम्मान पचा नहीं पाए... योगी को दबाव में लेकर उनपर ऐसे निर्णय थोपे जो संविधान और कानून का बड़ी निर्लज्जता से उल्लंघन करते हैं। मंच से चमकदार, धवल और खूबसूरत दिखती राजनीति का असली कुरूप और स्याह चेहरा आप भी देखें...

Wednesday, 16 March 2022

शपथ लेंगे, झूठ बोलेंगे, भ्रष्टाचार करेंगे और क्या..?



शपथ लेंगे, झूठ बोलेंगे और भ्रष्टाचार करेंगे... भारत में लोकतंत्र की यही दशा है। हर पांच साल पर चुनाव होता है। हर पांच साल पर जीतने वाले नेता शपथ-शपथ खेलते हैं... शपथ-ग्रहण की संवैधानिक बाध्यता नहीं होती तो नेता सत्य-निष्ठा और ईमानदारी की शपथ थोड़े ही लेते..! वे 'हैप्पी सत्ता डे' मनाते और अपने धंधे में लग जाते। झूठ, भ्रष्टाचार, पक्षपात, परिवारवाद भारतीय राजनीति के अनवार्य अवयव हो चुके हैं। अपने देश में संविधान और कानून केवल आम नागरिकों को अंकुश में रखने का उपकरण है। नेताओं को संविधान और कानून से क्या लेना-देना..? यह उपकरण उनका क्या बिगाड़ लेगा..? आज तक क्या बिगाड़ पाया..? जो थोड़े से लोग संविधान और कानून को नैतिकता और राष्ट्रीय-दायित्व के प्रिज़्म से देखते हैं, उन्हें न केवल यह विश्लेषण देखना चाहिए, बल्कि व्यापक जन-जागरूकता बनाने की पहल भी करनी चाहिए...

Friday, 11 March 2022

इस युद्ध की असली वजह क्या आप जानते हैं..?


रूस और युक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को आप फौरी तौर पर टीवी या अखबार के जरिए देख रहे हैं। युद्ध के कारण भी बताए जा रहे हैं, लेकिन मीडिया द्वारा बताए जा रहे कारण पश्चिम-प्रेरित हैं, या इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि पश्चिमी पूंजी-शक्तियों द्वारा स्पॉन्सर्ड हैं। युद्ध की वजहें कुछ और ही हैं... लेकिन असली वजहों को दबाने की पूरी कोशिश हो रही है। रूस-युक्रेन युद्ध की असली वजहों का निचोड़ तथ्यों और दस्तावेजों के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत है। कृपया देखें...

Wednesday, 23 February 2022

सरकारी खजाने से 7,000 करोड़ गायब..!


किस खजाने से देंगे मुफ्त की बिजली..?
वोट लेने के लिए तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का प्रलोभन देने वाली समाजवादी पार्टी के स्वयंभू अध्यक्ष अखिलेश यादव को चुनाव के दरम्यान जन-अदालत के समक्ष यह बताना चाहिए था कि उनके शासनकाल में सरकारी खजाने से गायब हुए सात हजार करोड़ रुपये कहां गए..? सात हजार करोड़ रुपये का हिसाब आज तक नहीं मिला। जब अखिलेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब भी राष्ट्रीय साप्ताहिक अखबार 'चौथी दुनिया' के जरिए मैंने उनसे पूछा था कि सात हजार करोड़ रुपए कहां गए..? और आज जब अखिलेश देशभर के पत्रकारों को चरित्र प्रमाण-पत्र बांटते फिर रहे हैं, तब 'द फायर' के माध्यम से हम पूछ रहे हैं, अखिलेश जी सरकारी खजाने से गायब सात हजार करोड़ के बारे में जनता को बताइये...

Sunday, 20 February 2022

स्कूल की किताबों से महापुरुष गायब, संघ की प्रार्थना से सावरकर गायब



स्कूल की किताबों से महापुरुष गायब, संघ की प्रार्थना से सावरकर गायब..!
देश में अजीबोगरीब स्थिति है... भाजपा का राष्ट्रवाद केवल चुनाव लड़ने और जीतने तक ही सीमित रह गया है। पूर्ण बहुमत की ताकत के साथ भाजपा पिछले आठ साल से केंद्रीय सत्ता पर आसीन है। लेकिन इस दरम्यान देश की संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को पुनरस्थापित करने का कोई उल्लेखनीय, संग्रहणीय या दर्शनीय कार्य नहीं हुआ। खंडित आजादी के सत्तर वर्षों में स्कूल-कॉलेजों की किताबों से देश के महापुरुष और क्रांतिपुरुष क्रमशः गायब होते चले गए। नस्लदूषित विकृत चरित्र के इतिहासकारों ने देश के गौरवशाली इतिहास पर कालिख पोती और देश के वीरों, क्रांतिकारियों और महापुरुषों को महानायक के रूप में स्थापित करने के बजाय उन्हें खलनायक साबित किया। विदेशी लुटेरों, हमलावरों, गुंडों और अधर्मी अत्याचारियों को महान बताया और इतिहास में महिमामंडित किया। देश को यह उम्मीद थी कि सत्तर साल के इस महापाप को धोने का स्वच्छ, सार्थक और स्थायी समाधान किया जाएगा, लेकिन ऐसा होता हुआ दिख नहीं रहा। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर गुच्छेदार भाषण परोसने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अलमबरदार संघ की प्रार्थना में वीर सावरकर का नाम तक शामिल नहीं कर पाए, तो उनसे और क्या उम्मीद रखी जाए? इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकती है?