Tuesday, 25 August 2026
शर्म-हया सब छू-मंतर... शोक में डूबा जंतर-मंतर..!
पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर छात्र आंदोलन के नाम पर जिस तरह अ-छात्र हरकतें हुईं, जिस तरह अश्लीलता, गाली-गलौज, अभद्रता और उद्दंडता का सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ और इन अशालीन हरकतों को जिस तरह दुर्बुद्धिजीवियों ने उकसाया और संरक्षण दिया, उसने देश-समाज को भीषण अंधकार से भरे भविष्य की ओर धकेलने का काम किया है। जंतर-मंतर की घटना तथाकथित सभ्य और बौद्धिक समाज के चारित्रिक, नैतिक और संस्कारिक स्खलन की दुर्भाग्यपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज हुई है। इस घटना ने इस विमर्श का रास्ता खोला है कि यह देश क्या नस्लदूषित चरित्रदूषित दुर्बुद्धिजीवियों, दुर्गतिगामी प्रगतिशीलों, सोलह कलाओं में माहिर कलाकारों, अराजकता और अश्लीलता से भरे अशिक्षित अ-छात्र समुदाय का देश बन जाएगा? जंतर-मंतर की घटना जिसे हम हादसा कह सकते हैं, उसने हमारे समक्ष असली और नकली का भेद साफ-साफ तौर पर उजागर किया है। इस गंभीर मसले पर हम देश के ‘असली’ बुद्धिजीवियों, ‘असली’ पत्रकारों, ‘असली’ समाजसेवियों और ‘असली’ कलाकारों से सार्थक विमर्श का सिलसिला शुरू कर रहे हैं... यह विचार-अभियान की तरह चलेगा... अपने देश भारतवर्ष की उत्कृष्ट संस्कृति और उन्नत परंपरा को सुरक्षित-संरक्षित रखते हुए विकास-यात्रा के हामी समझदार और जागरूक नागरिकों से आग्रह है कि वे भी इस विमर्श में शामिल हों और इसे विचार आंदोलन की तरह आगे बढ़ाएं... आप सबने जंतर-मंतर की घटना के बाद प्रस्तुत दो कार्यक्रम देखे। देश के प्रख्यात पत्रकार और लेखक विकास कुमार झा से हुई बातचीत आज आपके समक्ष प्रस्तुत हैं... आप सब इसे सुनें और अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएं। आपकी प्रतिक्रिया अगले विमर्श में शामिल हो सकती है... नमस्कार।
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